नीट यूजी 2024: 1,563 उम्मीदवारों के ग्रेस मार्क्स रद्द, पुनः परीक्षा की
**नीट यूजी 2024: 1,563 उम्मीदवारों के ग्रेस मार्क्स रद्द, पुनः परीक्षा की अनुमति, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया**
नीट (UG) 2024 के परिणामों में, 1,563 उम्मीदवारों को दिए गए ग्रेस मार्क्स को रद्द कर दिया गया है, जिससे इन उम्मीदवारों को पुनः परीक्षा देने की अनुमति दी गई है। इस निर्णय के पीछे कई विवाद और असंतोष उभरे हैं। छात्रों और विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाए हैं कि यह निर्णय उचित नहीं है और पारदर्शिता की कमी के कारण छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
**विवाद की पृष्ठभूमि**
इस वर्ष की नीट परीक्षा के दौरान कुछ परीक्षा केंद्रों पर समय की हानि के कारण कई छात्रों ने शिकायतें दर्ज कराई थीं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने उन छात्रों को ग्रेस मार्क्स दिए थे जिन्होंने समय की हानि के कारण प्रदर्शन पर प्रभाव पड़ने की शिकायत की थी। कुल 1,563 छात्रों को इस आधार पर ग्रेस मार्क्स दिए गए थे।
**असमानता और पुनः परीक्षा की मांग**
परिणामों की घोषणा के बाद, कई छात्रों और अभिभावकों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए। कुछ छात्रों का कहना था कि उन्हें भी समान समस्याओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्हें ग्रेस मार्क्स नहीं दिए गए। इसके अलावा, कुछ उम्मीदवारों ने 718 और 719 अंक प्राप्त किए, जो कि गणितीय दृष्टि से असंभव प्रतीत होता है, क्योंकि नीट की स्कोरिंग प्रणाली +4 और -1 अंक देती है।
इस विवाद के कारण, कई छात्र और उनके अभिभावकों ने पुनः परीक्षा की मांग की है। छात्रों का कहना है कि इस प्रकार की अनियमितताएं उनके भविष्य के लिए हानिकारक हो सकती हैं और उन्हें मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।
**सरकार और विपक्ष की प्रतिक्रिया**
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की अनियमितताएं छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और यह गंभीर चिंता का विषय है।
दूसरी ओर, एनटीए ने यह कहते हुए अपनी सफाई दी है कि ग्रेस मार्क्स देने का निर्णय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार था और यह छात्रों के प्रदर्शन में समय की हानि के कारण दिया गया था। एनटीए ने यह भी स्पष्ट किया कि परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्रों की कोई लीक नहीं हुई थी और परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखी गई थी।
**निष्कर्ष**
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि जिन 1,563 उम्मीदवारों के ग्रेस मार्क्स रद्द किए गए हैं, उन्हें पुनः परीक्षा देने की अनुमति दी जाएगी। इस विवाद ने नीट 2024 के परिणामों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं और इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग जोर पकड़ रही है।
NEET UG 2024 के परिणामों में विवाद तब शुरू हुआ जब 1,563 उम्मीदवारों को दिए गए ग्रेस मार्क्स रद्द कर दिए गए और उन्हें दोबारा परीक्षा देने का मौका दिया गया। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यह निर्णय कुछ उम्मीदवारों द्वारा परीक्षा के दौरान समय की कमी की शिकायतों के बाद लिया गया था।
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने बताया कि कई उम्मीदवारों ने समय की कमी की शिकायत की थी, जिसके कारण उन्हें ग्रेस मार्क्स दिए गए थे। NTA ने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व निर्णय के आधार पर लिया गया था। इस निर्णय के तहत उन उम्मीदवारों को ग्रेस मार्क्स दिए गए थे, जिनका परीक्षा के दौरान समय बर्बाद हुआ था।
इस मामले में, लगभग 67 उम्मीदवारों ने NEET UG 2024 में सर्वोच्च रैंक प्राप्त की, जिससे कई सवाल उठे कि कैसे इतने सारे उम्मीदवारों को 99.997129 पर्सेंटाइल स्कोर मिल सकता है। इसके अलावा, कुछ उम्मीदवारों ने 718 और 719 अंकों के साथ परिणाम प्राप्त किए, जबकि सामान्यतः पूर्ण अंक 720 होते हैं। इन विवादों के कारण उम्मीदवारों और उनके परिवारों में काफी आक्रोश है और उन्होंने पुनः परीक्षा की मांग की है।
कई छात्रों और विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर चर्चा की, जिससे यह मामला और भी गरम हो गया। कुछ ने कहा कि परीक्षा के दौरान समय की कमी के बावजूद उन्हें ग्रेस मार्क्स नहीं मिले, जबकि अन्य ने कहा कि कई केंद्रों पर पेपर लीक होने की भी खबरें आई हैं। इस विवाद के बीच, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इस मुद्दे पर जांच की मांग की है और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न करने की बात कही है।
NTA ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया है और यह सुनिश्चित किया है कि परीक्षा का संचालन पारदर्शी और निष्पक्ष हो।
इस विवाद से प्रभावित उम्मीदवारों को अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए जाने वाले पुनः परीक्षा के लिए तैयारी करनी होगी। इससे संबंधित छात्रों के लिए यह एक मानसिक और शारीरिक चुनौती हो सकती है, लेकिन इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाना आवश्यक है।


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